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भारतीय भेषज संहिता (आई.पी.), जो कि दवाओं के मानकों की आधिकारिक पुस्तक है ,के समय पर प्रकाशन से संबंधित मामलों से निपटने के लिए भारत सरकार ने भारतीय भेषज संहिता आयोग ( आई.पी.सी.) के रूप में एक अलग समर्पित,स्वायत्त संस्था का गठन किया । आई.पी. में ड्रग्स एंड कॉस्मेटिक्स एक्ट , 1940 के द्वितीय अनुसूची के मामले शामिल है , ताकि भारत में वितरित या वितरित की जाने वाली विक्रय के लिए आयातित दवाओं की पहचान , शुद्धता और ताकत के मानकों को निर्धारित किया जा सके। आयोग का अधिदेश भेषजसंहिता (आई.पी.) और भारतीय राष्ट्रीय फॉर्मूलेरी (एन.एफ.आई.) के संशोधन और प्रकाशन जैसे कार्यों को सदैव नियमित रूप से करने के अलावा, हितधारकों को भारतीय भेषजसंहिता संदर्भ पदार्थ (आई.पी.आर.एस.) और फार्माकोपियियल मुद्दों पर प्रशिक्षण प्रदान करना है। आयोग 1 जनवरी, 2009 से एक स्वायत्त निकाय के रूप में पूरी तरह से परिचालित हो गया है, जो स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय के प्रशासनिक नियंत्रण के तहत विशिष्ट बजटीय आवंटन के साथ केंद्र सरकार द्वारा पूरी तरह से वित्तपोषित है। सचिव, स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय इस आयोग के अध्यक्ष हैं एवं अध्यक्ष, वैज्ञानिक-मंडल सह-अध्यक्ष हैं। सचिव-सह-वैज्ञानिक निदेशक इस आयोग के मुख्य वैज्ञानिक और कार्यकारी अधिकारी हैं।

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